Hot
#देश

Dowry : ‘दहेज’ एक विदेशी कुप्रथा जो भारत में आई…..

बहुत समय से भारत में एक कुप्रथा का बहुत प्रचलन हे। जिसे ‘दहेज’ कहते हैं। मगर ये दहेज प्रथा भारत की अपनी नही बल्कि बाहरी लोगों की लाई गई प्रथा हे।

भारतीय नही हे दहेज प्रथा : भारत वो देश हे जिसे रिश्तों की पवित्रता के लिए जाना जाता हे। भारतीय विवाह पद्धति पूरे विश्व में सबसे अनोखी है। आज विश्व का लगभग हर देश अपनी मूल विवाह पद्धति को त्याग कर पश्चिमी विवाह पद्धति को अपनाकर अपने आप को धन्य समझते हैं। पर वहीं भारत आज भी अपनी हजारों वर्षों से चली आ रही वैदिक पद्धति से ही विवाह करतें हैं। यह अपने आप में ही बड़े गर्व की बात है। भारत आज भी अपने वैदिक विवाह पद्धति पर अडिग हे। और आज भारत की वैदिक विवाह पद्धति पूरे विश्व में आकर्षण का केंद्र हे। आज लोग सनातन को अपनाकर वैदिक संस्कृति को स्वीकार कर रहे हैं। पर वहीं भारतीय शादियों में अचानक से मध्यकाल में एक कुप्रथा का आगमन हुआ, जिसे ‘दहेज’ कहते हैं। इस कुप्रथा ने सैंकड़ो सालों से पता नही कितने परिवार नष्ट करें हैं। कितनी बहनों को इस कुप्रथा के चलते मार दिया गया, या उन्होंने प्रताड़ित होकर आत्महत्या कर ली। आज भी ये विचार का विषय हे की ये विदेशी कुप्रथा आज भी हमारे बीच क्यूं फल–फूल रही हे।

भारतीय समाज में दहेज प्रथा का आगमन : लगभग तेहरवीं सदी में में जब मध्य एशिया से लुटेरों ओर अक्रमणकारी भारत आए तो उन्होंने मध्य एशिया और मध्य–पूर्वी एशियाई देशों में चलने वाली कुप्रथाओं को अपने साथ लाए। उनके देशों में महिलाओं को भोग की वस्तु मात्र समझा जाता था। और आज भी समझा जाता है। वहां की नीच संस्कृति में शादी मात्र एक समझोता या करार होता हे। जिसे जब चाहें तय की गई कीमत चुका कर तोड़ा जा सकता हे। इनकी अनेकों कुप्रथाओं में से एक थी ‘दहेज प्रथा’। असल में ‘दहेज’ का मूल शब्द ‘जहेज़’ हे, आप यदि इन्ही अक्रमणकारियों के किसी वंशज के के मुंह से इसका उच्चारण सुनेंगे तो वह इसे ‘जहेज़’ ही बोलते हैं।

कैसे हमारी शादियों का हिस्सा बनी ‘दहेज कुप्रथा’ : इन मध्य एशिया और मध्य पूर्वी एशिया से आए लुटेरों के प्रभाव में आने वाले कुछ लोभी भारतीयों ने इनकी दहेज नमक कुप्रथा को बड़े शौक से अपनाया क्यूंकि ये प्रथा उनके लालच को एक सामाजिक रश्म का रूप दे रही थी। आगे जाकर ये प्रचलन पूरे भारतीय समाज में फैल गया। देखते ही देखते भारतीय विवाह इस कुप्रथा की चपेट में आ गया। आज विवाह की सारी जरूरी तैयारियों से पहले ये तय किया जाता हे की बधु पक्ष, वर पक्ष को कितना दहेज देने वाले हैं। लड़का जितना योग्य होगा दहेज उतना ही ज्यादा देना होगा ये आज एक सामान्य सोच बन चुकी है।

बधु पक्ष भी बराबार दोषी हे : दहेज प्रथा की परंपरा को सिर्फ वर पक्ष की आगे नहीं बढ़ा रहे हैं बल्कि बधु पक्ष भी इसमें बराबर से शामिल हे। आज बधु पक्ष के लिए अच्छा दहेज देना सम्मानजनक बात हे। आपने अपनी बेटी को शादी में कितना दहेज दिया इस तथाकथित गौरवशाली बात को आजीवन लोगों को बताते फिरते हैं।

क्या हो सकता हे निवारण : हमारे देश में महिलाओं को देवी समान पूजा जाता हे। भारत पूरे विश्व का एकमात्र देश हे जहां बहु को घर की लक्ष्मी माना जाता है। हमें ये समझना होगा की हमारा धर्म हमें क्या सिखाता है। घर में आई बहु अपने साथ धन–दौलत नहीं लाती बल्कि इसके शुभ आगमन से और उसकी अपने नए परिवार के प्रति निष्ठा और प्रयास से समृद्धि लाती हे। हमें अपनी संस्कृति और धर्म पर गर्व करना चाहिए। लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद

Posted by – Anirudh Kumar

anirudhkumar9625@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *