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#आध्यात्म

Radhe Radhe kyo bolte hai ? / राधे-राधे क्यों बोला जाता है ?

हमने अक्सर देखा है की लोग अभिवादन में राम-राम बोलते हैं जिसका मतलब हमने केबल दो बार श्री राम का नाम लेके पूरी 108 बार राम नाम की माल जपली परंतु श्री कृष्ण का नाम दो बार लेने की जगह हम राधे – राधे क्यूँ बोलते हैं जानते हैं श्री राधा जी का नाम दो बार क्यूँ लिया जाता है।

तो इसीलिए बोल जाता है राधे-राधे।

एक प्रसंग के अनुसार नन्द गाँव में एक मोर नन्द भगवान श्री कृष्ण की चौखट पर प्रतिदिन या जाता था। और श्री कृष्ण को रिझाने की कोशिश करता था। वह एक साल से रोज श्री कृष्ण की चौखट पर आकार ” कृष्ण-कृष्ण ” गाता था। पर एक बार भी उसे श्रीकृष्ण के दर्शन प्राप्त नहीं हुए, वो रोज श्रीकृष्ण से न मिल पाने की वेदना में विलख-विलख कर रोता रहता था। और बस ” कृष्ण-कृष्ण ” गाता रहता था इसी प्रतीक्षा में की काभी तो श्रीकृष्ण दर्शन देंगें ।
एक बार वहाँ से एक मैना जा रही थी। उसे ये देख बड़ा आश्चर्य हुआ की भगवान श्रीकृष्ण की चौखट पर आकार भी ये मोर रो रहा है। तब उस मैना ने उस मोर के पास जाकर पूछा – तुम रोते क्यूँ हो ? तुम तो भगवान श्रीकृष्ण के इतने समीप हो। तब उस मोर ने बड़े ही दुखी स्वर में कहा – में पिछले एक वर्ष से कान्हा को रिझाने का प्रयास कर रहा हूँ। प्रतिदिन में यहाँ आकार ” कृष्ण-कृष्ण ” गीत गाता हूँ पर कान्हा एक बार भी मुझसे मिलने नही आए। मोर की बातें सुनकर मैना हसके बोली – तू यहाँ बेठकर समय व्यर्थ कर रहा है, अगर तुझे कृपा प्राप्त करनी है तो जा बरसाने ओर श्री राधा रानी जी की चौखट पर श्रीकृष्ण के गीत गा फिर देख कैसे कृपा बरसती है तुझपर। मैना की बातें सुनके मोर बरसाने चल जाता है और श्री राधा रानी जी की चौखट पर जाकर श्री कृष्ण के गीत गा रहा था की तुरंत राधा जी दौड़कर आईं और बड़े ही प्यार से मोर को अपने हाथों से दाना चुगाने लगीं, और मोर से बोलीं मेरे प्रियतम का नाम तू और सुना – और सुना राधा रानी जी के कहने पर मोर श्रीकृष्ण के गीत गाता रहा श्री राधा रानी जी को प्रसन्न कर मोर धन्य हो गया। मोर ने राधा जी से कहा – में पिछले एक वर्ष से कान्हा की चौखट पर बैठकर उनके गीत गा रहा था पर उनके दर्शन न हुए और यहाँ तो एक बार में ही आपकी कृपा हो गई। इसपर श्री राधा रानी जी बोलीं – तुम पिछले एक वर्ष से श्री कृष्ण के गीत गा रहे थे आज उसी का तो यह फल है, अब वापिस वहाँ जाओ ओर कुछ कृष्ण को भी सुनाओ। मोर श्री राधा रानी से आज्ञा लेकर वापिस नन्द गाँव आया, और इस बार श्रीकृष्ण जी की चौखट पर बैठकर श्री राधा रानी के गीत गाने लगा। जैसे ही राधा जी के नाम का उच्चारण किया तो श्री कृष्ण जी व्याकुल हो उठे की कौन मेरी राधा का नाम ले रहा है, वे दौड़े-दौड़े आए ओर उस मोर को अपने गले से लगा लिया ओर बोले – तूने मेरी राधा का नाम लेकर मुझे बहुत प्रसन्न कर दिया तू धन्य है। मोर शिकायती स्वर में श्री कृष्ण से बोला – हे कान्हा एक बात बताइए में यहाँ पिछले एक वर्ष से बैठकर आपके नाम के गीत गा रहा हूँ पर आप एक बार भी नहीं आए ओर जब मेने श्री राधा जी का नाम लिया तो एक बार में ही आप दौड़े-दौड़े चले आए ओर मुझे अपने गले से लगा लिया। उसके प्रश्न पर श्रीकृष्ण जी बोले – राधा नाम मुझे सबसे प्रिय है, राधा नाम में मेरे प्राण बसते हैं, राधे के नाम के आगे मुझे सारा संसार फीका लगता है ओर राधा के नाम से ही मुझे सारा संसार आनंदमाई लगने लगता है। आज तूने राधा का नाम सुनाकर मुझे प्रसन्न कर दिया है। तू बहुत भाग्यशाली है मांग क्या चाहता है। पर मोर ने कहा बस श्री कृष्ण की कृपा के अलावा ओर कुछ नहीं चाहिए। भगवान श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर उस मोर से कहा – आज तुमने राधा नाम सुनाकर हमें अपना ऋणी बना लिया है आज से आजीवन हम तुम्हारा पंख अपने श्री मुकुट पर विराजमान करके रखेंगे।
जिस नाम को सुनकर श्री कृष्ण अपनी कृपा का सारा भंडार खोल देते हों ऐसी करुणामयी राधा रानी जी का नाम दो बार लेने से हम भगवान श्री कृष्ण की क्रपा अपने ऊपर बनाए रखते हैं। तो बोलो ” राधे – राधे “


Posted by – अनिरुद्ध कुमार

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