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Katchatheevu Island / क्या है कच्छथीवू टापू ? जाने पूरी कहानी ।

10 अगस्त को पीएम मोदी जी ने संसद भवन में कई मुद्दों पर बात की और इसी के साथ ही भारत के एक खिये हुए टापू पर भी पीएम ने बयान दिया और विपक्ष से सवाल करते हुए कहा “49 साल पहले हमने एक टापू गँवा दिया था इसकी ज़िम्मेदारी किसपे आती है ?” जानिए क्या है कच्छथीवू टापू की कहानी ।

कहाँ स्थित है कच्छथीवू टापू ?

भारत और श्रीलंका के मध्य स्थित ये टापू कभी भारत का हिस्सा हुआ करता था परंतु 70वें दशक में भारत ने श्रीलंका के साथ अपनी समुद्री सीमाओं को व्यवस्थित करने का निर्णय लिया और ये सुनिश्चित किया की आगे कभी भी सीमाओं को लेकर भारत – श्रीलंका के मध्य कोई भी विवाद ना हो भारत के इस प्रस्ताव पर दोनों देशों की सीमाओं के निर्धारण पर श्रीलंका से बातचीत शुरू हुई और 1974 से 1976 में मध्य दोनों देशों के बीच एक एग्रीमेंट साइन किया गया पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के नेतृत्व में भारत से उस समय एक बड़ी चूक हो गई और दोनों देशों की बातचीत के दौरान कच्छथीवू टापू श्रीलंका को दे दिया इस निर्णय पर उस समय तमिलनाडु के लोगो ने विरोध किया और नाराज़गी जताई क्यूँकि ऐतिहासिक तौर पर ये टापू भारत का हिस्सा था।

ऐतिहासिक ही नहीं कमर्शियली भी बहुत महत्वपूर्ण हे ये टापू

कच्छथीवू टापू तमिलनाडु के मछुआरों के लिये बहुत महत्वपूर्ण हे यहां आसपास बहुत फिशिंग पोटेन्शियल है। ये मछली पकड़ने के लिए बहुत महत्वपूर्ण जगह है। आपने काफ़ी बार सुना होगा कि भारतीय मछुआरों फिशिंग करते हुए श्रीलंका कि सीमाओं पर पहुँच हए और श्रीलंकन कोस्टल गार्ड ने उन्हें पकड़ लिया इसके बाद हमारे मछुआरे कई सालों तक श्रीलंका कि जेलो में बंद रहते हैं। यह सब समस्या इतनी ना होती अगर कच्छथीवू टापू भारत के पास होता।

क्या भारत वापिस ले सकता हे ये टापू ?

दुनिया भर में फिशिंग स्पॉट की बहुत कमी है ऐसी स्थिति में कच्छथीवू टापू फिशिंग इंडस्ट्री के लिए बहुत महत्व रखता है, श्रीलंका लीगल एग्रीमेंट के तहत आये इस टापू को नहीं छोड़ सकता। इसके बाद श्रीलंकाई नागरिकों की राष्ट्रीय भावना भी इस से जुड़ चुकी है यह इतना आसान नहीं हो सकता। मान लीजिए आज के समय यदि भारत श्रीलंका के समक्ष कर्ज देकर उनकी अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के बदले इस टापू को लेने का भी प्रस्ताव रखे तो वहाँ की जानता को यह स्वीकार नहीं होगा

भारत क्या कर सकता है

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हमेशा से कच्छथीवू टापू का मुद्दा प्रधानमंत्री के समक्ष रखते हैं। परंतु एक ऐतिहासिक गलती के कारण श्रीलंका को दिये इस टापू को वापस लेना भारत के लिए मुश्किल हे। पर हम इस घटना से ये ज़रूर सीख सकते हैं की ऐसी गलती दोवारा ना हो। ऐसा कोई भी एग्रीमेंट करने से पहले अपनी सीमाओं का अध्यन करें।

Posted By – अनिरुद्ध कुमार

Katchatheevu Island / क्या है कच्छथीवू टापू ? जाने पूरी कहानी ।

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