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इजराइल : न्यायिक सुधार बिल के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच PM नेतन्याहू का पेसमेकर प्रतिरोपण सफल, डिस्चार्ज किए गए

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू सरकार की न्यायिक सुधार नीति के तहत कोर्ट की शक्तियां काफी कम हो जाएगी। योजना के तहत अब संसद में कोर्ट के किसी भी फैसले को बहुमत के जरिए बदल सकते हैं। अदालत संसद द्वारा बनाए गए कानूनों की समीक्षा नहीं कर पाएगी।

इस्राइल में न्यायिक सुधार विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। न्यायिक सुधार बिल पर पहले से ही बवाल मचा हुआ है। बिल के लिए अगले सप्ताह की शुरुआत में अंतिम मतदान किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने नेसेट के पास एक टेंट सिटी स्थापित की है। इस बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को रविवार तड़के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया गया है कि उनकी धड़कनें असंतुलित थीं। इसके बाद रविवार को उन्हें पेसमेकर लगाने की सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई। नेतन्याहू का पेसमेकर प्रतिरोपण ऑपरेशन रविवार तड़के रामत गन स्थित शेबा मेडिकल सेंटर में हुआ। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि नेतन्याहू के ऑपरेशन के दौरान उपप्रधानमंत्री एवं विधि मंत्री यारिव लेविन ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

पिछले हफ्ते नेतन्याहू (73) को गलील सागर की यात्रा के दौरान भीषण गर्मी में कई घंटे तक धूप में रहने के चलते चक्कर आने की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान उनकी हृदयगति पर एक उपकरण की मदद से नजर रखी गई। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि ऑपरेशन सफल रहा और नेतन्याहू अच्छा महसूस कर रहे हैं तथा उन्हें रविवार को ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाने की उम्मीद है। पेसमेकर हृदयगति को नियमित करने में मदद करता है। 

न्यायिक सुधार विधेयक को लेकर घिरे हैं नेतन्याहू
प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक बदलाव के खिलाफ रैली निकालते हुए तेलअवीव और यरूशलेम में विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने चार प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। इस्राइली मीडिया के अनुसार, नेतन्याहू सरकार देश के न्यायिक व्यवस्था में सुधार के लिए एक प्रस्ताव लाई है, जिसके बाद शनिवार को प्रदर्शन किया गया। बिल लागू होने के बाद सरकार को न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार मिल सकेगा। विधेयक को कानून बनने में अतिरिक्त दो वोटों के पारित होने की आवश्यकता है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिल के कारण देश दो घड़ो में बंट गया है। बिल ने इजराइल के इतिहास में सबसे बड़े विरोध आंदोलनों में से एक को जन्म दिया है।

लोकतंत्र को खतरा
नेतन्याहू सरकार के खिलाफ लोगों का आरोप है कि सरकार की योजना देश की जांच व्यवस्था पर हमला है। उनका मानना है कि सरकार के इस कदम से लोकतंत्र खतरे में आ जाएगा। यहूदी महिलाओं की राष्ट्रीय परिषद प्रमुख शीला काट्ज ने कुछ समय पहले कहा था कि यह न्यायिक सुधार के बारे में नहीं है, यह लोकतंत्र के बारे में है। कोर्ट पवित्र होते हैं। कोर्ट लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए होते हैं, इसलिए कोर्ट को राजनीति से दूर रखना चाहिए।

न्यायिक सुधार नीति में यह होंगे प्रावधान
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू सरकार की न्यायिक सुधार नीति के तहत कोर्ट की शक्तियां काफी कम हो जाएगी। योजना के तहत अब संसद में कोर्ट के किसी भी फैसले को बहुमत के जरिए बदल सकते हैं। अदालत संसद द्वारा बनाए गए कानूनों की समीक्षा नहीं कर पाएगी। चूंकि इस्राइली संसद में नेतन्याहू के पास बहुमत है इसलिए वह कोर्ट के किसी भी फैसले को पलटने में सक्षम हैं।

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